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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 67
श्लोक
5.1.67
कंसाय चाष्टमो गर्भो देवक्या धरणीधर:।
भविष्यतीत्याचचक्षे भगवान्नारदो मुनि:॥ ६७॥
अनुवाद
इस समय भगवान नारद कंस के पास आये और उसे बताया कि देवकी के आठवें गर्भ में भगवान धरणीधर का जन्म होगा।
At this time Lord Narada came to Kansa and told him that in the eighth pregnancy of Devaki, Lord Dharnidhar would be born.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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