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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 64
श्लोक
5.1.64
वसुदेवस्य या पत्नी देवकी देवतोपमा।
तत्रायमष्टमो गर्भो मत्केशो भविता सुरा:॥ ६४॥
अनुवाद
मेरा यह (श्याम) बाल वसुदेव की देवकी नाम वाली पत्नी के आठवें गर्भ से अवतार लेगा जो देवी के समान है ॥ 64॥
This (shyam) hair of mine will take incarnation from the eighth pregnancy of Vasudev's wife named Devaki who is like a goddess. ॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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