श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.1.6 
कंसस्तयोर्वररथं चोदयामास सारथि:।
वसुदेवस्य देवक्या: संयोगे भोजनन्दन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वसुदेव और देवकी का विवाह संपन्न होने के बाद [उनके प्रस्थान के समय] भोजनंदन कंस सारथी बन गया और उनके शुभ रथ को हांकने लगा।
 
After the matrimonial relations of Vasudeva and Devaki were solemnized [at the time of their departure] Bhojanandana Kansa became the charioteer and began to drive their auspicious chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)