श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  5.1.57 
एषा मही देव महीप्रसूतै-
र्महासुरै: पीडितशैलबन्धा।
परायणां त्वां जगतामुपैति
भारावतारार्थमपारसार॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! महादैत्यों के उत्पात से इस पर्वतरूपी पृथ्वी की जड़ें दुर्बल हो गई हैं। अतः हे अनंत शक्ति! संसार का भार उतारने के लिए यह पृथ्वी आपकी शरण में आई है। ॥57॥
 
O Lord! The roots of this earth in the form of mountains have become weak due to the havoc created by the great demons. Therefore, O infinite power! This earth has come to your refuge to relieve the burden of the world. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)