श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.1.56 
सूक्ष्मातिसूक्ष्मातिबृहत्प्रमाण
गरीयसामप्यतिगौरवात्मन्।
प्रधानबुद्धीन्द्रियवत्प्रधान-
मूलात्परात्मन‍्भगवन‍्प्रसीद॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे भगवन्! आप सूक्ष्म से भी सूक्ष्म, गुरुओं के भी गुरु और सबसे बड़े प्रमाण हैं तथा मूल (प्रकृति) महत्त्व और अहंकार में भी मूल तत्त्व रूप मूल पुरुष से भी परे हैं; हे भगवन्! आप हम पर प्रसन्न रहें॥56॥
 
Oh God! You are the subtlest of the subtle, the Guru of the Guru and the biggest proof, and you are beyond even the original Purusha who is the main element in the main (nature) greatness and ego; Oh God! You be happy with us. 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)