श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  5.1.55 
ब्रह्मोवाच
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्व:
सहस्रबाहो बहुवक्त्रपाद।
नमो नमस्ते जगत: प्रवृत्ति-
विनाशसंस्थानकराप्रमेय॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले- हे सहस्त्रबाहु (हजार भुजाओं वाले)! हे अनंत मुख और चरणों वाले! आपको हजार बार नमस्कार है। हे जगत के रचयिता, पालनकर्ता और संहारकर्ता! हे अथाह! आपको बार-बार नमस्कार है॥ 55॥
 
Brahmaji said- O Sahastra-baho (one with thousand arms)! O one with infinite face and feet! Salutations to you a thousand times. O the creator, maintainer and destroyer of the world! O immeasurable! Salutations to you again and again.॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)