श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.1.54 
श्रीपराशर उवाच
ततो ब्रह्मा हरेर्दिव्यं विश्वरूपमवेक्ष्य तत्।
तुष्टाव भूयो देवेषु साध्वसावनतात्मसु॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - तब श्रीहरि के उस दिव्य विश्वरूप को देखकर सब देवता भय से दब गए और ब्रह्माजी पुनः उनकी स्तुति करने लगे ॥54॥
 
Shri Parasharji said - Then after seeing that divine universal form of Shri Hari, all the gods became humbled by fear and Brahmaji started praising him again. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)