श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  5.1.53 
श्रीभगवानुवाच
भो भो ब्रह्मंस्त्वया मत्तस्सह देवैर्यदिष्यते।
तदुच्यतामशेषं च सिद्धमेवावधार्यताम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
श्रीभगवान बोले - हे ब्रह्मन्! देवताओं सहित जो कुछ तुम्हारी इच्छा हो, उसे मुझसे कहो और उसे पूर्ण समझो ॥53॥
 
Sri Bhagavan said - O Brahman! Tell me whatever you desire along with the Gods and consider it as accomplished. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)