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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 52
श्लोक
5.1.52
श्रीपराशर उवाच
इत्येवं संस्तवं श्रुत्वा मनसा भगवानज:।
ब्रह्माणमाह प्रीतेन विश्वरूपं प्रकाशयन्॥ ५२॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - यह स्तुति सुनकर भगवान अज अपना विश्वरूप प्रकट करके प्रसन्न मन से ब्रह्माजी से कहने लगे ॥52॥
Shri Parasharji said - Hearing this praise, Lord Aj, revealing His universal form, started saying to Brahmaji with a happy mind. 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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