श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.1.51 
नाकारणात्कारणाद्वा कारणाकारणान्न च।
शरीरग्रहणं वापि धर्मत्राणाय केवलम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
आप अकारण या अकारण जन्म नहीं लेते, अपितु धर्म की रक्षा के लिए ही जन्म लेते हैं ॥51॥
 
You do not take birth without any reason or without any reason, but you do so only for the protection of Dharma. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)