श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.1.50 
सकलावरणातीत निरालम्बनभावन।
महाविभूतिसंस्थान नमस्ते पुरुषोत्तम॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! आप समस्त आवरणों से रहित, असहायों के रक्षक और समस्त महापुरुषों के आधार हैं! आपको नमस्कार है ॥50॥
 
You are devoid of all coverings, protector of the helpless and the support of all great personalities, O Purushottama! Salutations to you. ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)