श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.1.49 
निरवद्य: पर: प्राप्तेर्निरधिष्ठोऽक्षर: क्रम:।
सर्वेश्वर: पराधारो धाम्नां धामात्मकोऽक्षय:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
आप निर्दोष, अप्राप्य, आधारहीन और अबाधित गति वाले हैं। आप सबके स्वामी, अन्य ब्रह्माओं के आधार, सूर्य आदि तेजों के समान तेजस्विनी तथा अविनाशी हैं ॥49॥
 
You are blameless, unattainable, without foundation and uninterrupted movement. You are the master of all, the support of the other Brahmas and the radiance of the Sun and other radiances and are indestructible. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)