श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.1.47 
व्यक्ताव्यक्तस्वरूपस्त्वं समष्टिव्यष्टिरूपवान्।
सर्वज्ञस्सर्ववित्सर्वशक्तिज्ञानबलर्द्धिमान्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
आप व्यक्त और अव्यक्त, सर्वव्यापक और व्यष्टि हैं। आप सर्वज्ञ, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सम्पूर्ण ज्ञान, शक्ति और ऐश्वर्य से युक्त हैं ॥47॥
 
You are the manifest and the unmanifest, the universal and the individual. You are the omniscient, the omniscient, the omnipotent and the endowed with complete knowledge, power and prosperity. ॥47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)