श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.1.44 
एकश्चतुर्द्धा भगवान‍्हुताशो
वर्चोविभूतिं जगतो ददासि।
त्वं विश्वतश्चक्षुरनन्तमूर्ते
त्रेधा पदं त्वं निदधासि धात:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे अनंतमूत्र! आप ही चार प्रकार की अग्नि बनकर जगत को तेज और कीर्ति प्रदान करते हैं। हे अनंतमूत्र! आपकी दृष्टि सर्वत्र व्याप्त है। हे धाता! आप ही त्रिविक्रम अवतार में तीनों लोकों में अपने तीन चरण रखते हैं। 44।
 
You are the one who becomes four types of fire and gives brightness and glory to the world. O Anantamootra! Your eyes are everywhere. O Dhaat:! You are the one who [in the Trivikrama avatar] places your three steps in the three worlds. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)