श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  5.1.43 
त्वं विश्वनाभिर्भुवनस्य गोप्ता
सर्वाणि भूतानि तवान्तराणि।
यद्भूतभव्यं यदणोरणीय:
पुमांस्त्वमेक: प्रकृते: परस्तात्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
आप ही ब्रह्माण्ड के केन्द्र और तीनों लोकों के रक्षक हैं; सम्पूर्ण प्राणी आपमें ही स्थित हैं। भूत, भविष्य और सूक्ष्मतम परमाणु जो भी हैं, वे सब आप ही हैं, प्रकृति से परे एकमात्र परब्रह्म आप ही हैं ॥ 43॥
 
You are the center of the universe and the protector of the three worlds; all beings exist in you. Whatever is past, future and the tiniest of atoms is you, the one and only Supreme Being, beyond nature. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)