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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 37
श्लोक
5.1.37
ऋग्वेदस्त्वं यजुर्वेदस्सामवेदस्त्वथर्वण:।
शिक्षाकल्पोनिरुक्तं च च्छन्दोज्यौतिषमेवच॥ ३७॥
अनुवाद
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद आप ही हैं। आप शिक्षा, कल्प, निरुक्त, छंद और ज्योतिष विज्ञान हैं॥ 37॥
You are the Rigveda, Yajurveda, Samaveda and Atharvaveda. You are the Shiksha, Kalpa, Nirukta, Chhanda and the astrology science.॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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