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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 36
श्लोक
5.1.36
द्वे ब्रह्मणी त्वणीयोऽतिस्थूलात्मन्सर्व सर्ववित्।
शब्दब्रह्म परं चैव ब्रह्म ब्रह्ममयस्य यत्॥ ३६॥
अनुवाद
हे अति सूक्ष्म! हे विराट् रूप! हे सर्वज्ञ! शब्द ब्रह्म और पर ब्रह्म - दोनों ही परब्रह्म के ही रूप हैं ॥ 36॥
O extremely subtle one! O vast form! O all! O omniscient one! Shabda Brahma and Para Brahma - both are forms of the Supreme Brahma. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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