श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.1.35 
ब्रह्मोवाच
द्वे विद्ये त्वमनाम्नाय परा चैवापरा तथा।
त एव भवतो रूपे मूर्तामूर्तात्मिके प्रभो॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - हे वेदों के अदृश्य स्वामी! ये दोनों विद्याएँ - परा और अपरा - आप ही हैं। हे प्रभु! ये दोनों आपके ही दृश्य और अदृश्य रूप हैं।
 
Brahmaji said - O invisible Lord of the Vedas! Both these knowledges - Para and Apara - are You. O Lord! Both of them are Your visible and invisible forms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)