श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.1.34 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्त्वा प्रययौ तत्र सह देवै: पितामह:।
समाहितमनाश्चैवं तुष्टाव गरुडध्वजम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - ऐसा कहकर पितामह ब्रह्माजी देवताओं सहित वहाँ गए और एकाग्र मन से भगवान श्री गरुड़ध्वज की इस प्रकार स्तुति करने लगे॥34॥
 
Shri Parasharji said - Saying this, Grandfather Brahmaji along with the gods went there and with a concentrated mind started praising Lord Shri Garudadhvaj in this way. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)