श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.1.33 
सर्वथैव जगत्यर्थे स सर्वात्मा जगन्मय:।
सत्त्वांशेनावतीर्योर्व्यां धर्मस्य कुरुते स्थितिम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वे विश्वात्मा सम्पूर्ण जगत् के कल्याण के लिए अपने शुद्ध सत्वंश से अवतार लेते हैं और पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करते हैं ॥33॥
 
He, the Universal Soul, incarnates from His pure Satvansh for the benefit of the entire world and establishes religion on earth. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)