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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 32
श्लोक
5.1.32
तदागच्छत गच्छाम क्षीराब्धेस्तटमुत्तमम्।
तत्राराध्य हरं तस्मै सर्वं विज्ञापयाम वै॥ ३२॥
अनुवाद
इसलिए आओ, अब हम क्षीरसागर के पवित्र तट पर चलें, वहाँ भगवान श्रीहरि का पूजन करें और उन्हें यह सम्पूर्ण वृत्तान्त सुनाएँ ॥ 32॥
Therefore, come, let us now go to the sacred banks of the Kshirsagar, worship Lord Hari there and narrate this entire incident to him. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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