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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 31
श्लोक
5.1.31
विभूतयश्च यास्तस्य तासामेव परस्परम्।
आधिक्यं न्यूनता बाध्यबाधकत्वेन वर्तते॥ ३१॥
अनुवाद
उनकी जो भी महिमाएँ हैं, उनकी परस्पर न्यूनता और अधिकता ही बन्धनकारी और बाधक रहती है ॥31॥
Whatever are His glories, their mutual deficiency and excess remain binding and obstructing. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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