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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 29
श्लोक
5.1.29
इत्याकर्ण्य धरावाक्यमशेषैस्त्रिदशेश्वरै:।
भुवो भारावतारार्थं ब्रह्मा प्राह प्रचोदित:॥ २९॥
अनुवाद
पृथ्वी के ये वचन सुनकर ब्रह्माजी ने समस्त देवताओं की प्रेरणा से उसका भार कम करने की बात कही॥29॥
Having heard these words of the Earth, Lord Brahma, with the inspiration of all the gods, began speaking about reducing her burden. ॥ 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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