श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.1.28 
क्रियतां तन्महाभागा मम भारावतारणम्।
यथा रसातलं नाहं गच्छेयमतिविह्वला॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे महाभाग्यवानों, आप कृपा करके मेरे भार से मुक्ति का कोई उपाय कीजिए, जिससे मैं अत्यन्त दुःखी होकर रसातल में न जाऊँ ॥28॥
 
Therefore, O highly fortunate ones, please find a way to relieve me of my burden so that I do not become extremely distressed and go to the abyss. ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)