श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.1.27 
तद्भूरिभारपीडार्त्ता न शक्नोम्यमरेश्वरा:।
विभर्त्तुमात्मानमहमिति विज्ञापयामि व:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे अमर देवों! मैं तुमसे कहता हूँ कि अब मैं उनका भारी भार सहन करने में सर्वथा असमर्थ हूँ ॥27॥
 
O immortal lords! I tell you that I am now completely unable to bear their immense weight. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)