श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  5.1.24-25 
अरिष्टो धेनुक: केशी प्रलम्बो नरकस्तथा।
सुन्दोऽसुरस्तथात्युग्रो बाणश्चापि बलेस्सुत:॥ २४॥
तथान्ये च महावीर्या नृपाणां भवनेषु ये।
समुत्पन्ना दुरात्मानस्तान्न संख्यातुमुत्सहे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अरिष्ट, धेनुक, केशी, प्रलम्ब, नरक, सुन्द, बालिकापुत्र, अत्यन्त भयंकर बाणासुर तथा अन्य अनेक अत्यन्त बलवान तथा दुष्ट बुद्धि वाले राक्षस जो राजाओं के कुलों में उत्पन्न हुए थे, उनकी संख्या मैं नहीं गिन सकता।
 
I cannot count the number of Arishta, Dhenuk, Keshi, Pralamba, Naraka, Sunda, Balika's son, the extremely fearsome Banasura and many other extremely powerful and evil-minded demons who were born in the families of kings. 24-25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)