श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.1.2 
अंशावतारो ब्रह्मर्षे योऽयं यदुकुलोद्भव:।
विष्णोस्तं विस्तरेणाहं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
अब हे ब्रह्मर्षे! मैं यदुकुल में भगवान विष्णु के अंशावतार के विषय में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। 2॥
 
Now, O Brahmarshe! I want to hear in detail about the partial incarnation of Lord Vishnu in Yadukul. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)