vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
»
श्लोक 2
श्लोक
5.1.2
अंशावतारो ब्रह्मर्षे योऽयं यदुकुलोद्भव:।
विष्णोस्तं विस्तरेणाहं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥ २॥
अनुवाद
अब हे ब्रह्मर्षे! मैं यदुकुल में भगवान विष्णु के अंशावतार के विषय में विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ। 2॥
Now, O Brahmarshe! I want to hear in detail about the partial incarnation of Lord Vishnu in Yadukul. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×