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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 19
श्लोक
5.1.19
यक्षराक्षसदैतेयपिशाचोरगदानवा:।
गन्धर्वाप्सरसश्चैव रूपं विष्णोर्महात्मन:॥ १९॥
अनुवाद
यक्ष, राक्षस, दैत्य, पिशाच, सर्प, राक्षस, गंधर्व और अप्सरा आदि भी महात्मा विष्णु के ही रूप हैं। 19॥
Yaksha, Rakshasa, Daitya, Pishaach, Serpent, Demon, Gandharva and Apsara etc. are also the forms of Mahatma Vishnu. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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