श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  5.1.17-18 
आदित्या मरुतस्साध्या रुद्रा वस्वश्विवह्नय:।
पितरो ये च लोकानां स्रष्टारोऽत्रिपुरोगमा:॥ १७॥
एते तस्याप्रमेयस्य विष्णो रूपं महात्मन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आदित्य, मरुद्गण, साध्यगण, रुद्र, वसु, अग्नि, पितृगण और अत्रि आदि प्रजापति- ये सभी अतुलनीय महात्मा विष्णु के ही रूप हैं। 17-18॥
 
Aditya, Marudgana, Sadhyagana, Rudra, Vasu, Agni, Pitrugana and Atri etc. Prajapatis - all these are the forms of the incomparable Mahatma Vishnu. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)