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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 1: वसुदेव-देवकीका विवाह, भारपीडिता पृथिवीका देवताओंके सहित क्षीरसमुद्रपर जाना और भगवान् का प्रकट होकर उसे धैर्य बँधाना, कृष्णावतारका उपक्रम
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श्लोक 11
श्लोक
5.1.11
श्रीपराशर उवाच
तथेत्याह तत: कंसो वसुदेवं द्विजोत्तम।
न घातयामास च तां देवकीं सत्यगौरवात्॥ ११॥
अनुवाद
श्री पराशर बोले, ‘हे दोनों भाइयों में श्रेष्ठ!’ तब कंस ने सत्य के अभिमान से युक्त होकर वसुदेव से कहा, ‘बहुत अच्छा’ और देवकी को नहीं मारा।
Shri Parashara said, 'Oh best of the two brothers!' Then Kansa, being proud of the truth, said to Vasudev, 'Very good' and did not kill Devaki.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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