श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 9: महाराज रजि और उनके पुत्रोंका चरित्र  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.9.8 
न वयमन्यथा वदिष्यामोऽन्यथा करिष्यामोऽस्माकमिन्द्र: प्रह्लादस्तदर्थमेवायमुद्यम इत्युक्त्वा गतेष्वसुरेषु देवैरप्यसाववनिपतिरेवमेवोक्तस्तेनापि च तथैवोक्ते देवैरिन्द्रस्त्वं भविष्यसीति समन्वीप्सितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर दैत्यों ने कहा, "हम एक बात कहते हैं और फिर उसके विपरीत कार्य करते हैं, ऐसा नहीं है। हमारे इन्द्र तो प्रह्लादजी हैं और हमारी सारी चेष्टाएँ उन्हीं के लिए हैं।" ऐसा कहकर जब दैत्य चले गए, तो देवताओं ने भी आकर राजा से उसी प्रकार प्रार्थना की और उसने उनसे भी यही बात कही। तब देवताओं ने उसकी बात स्वीकार करते हुए कहा, "आप ही हमारे इन्द्र होंगे।"
 
Hearing this, the demons said, "We do not say one thing and then act against it in a different way. Our Indra is Prahladji and all our efforts are for him." After saying this, when the demons left, the gods also came and prayed to the king in the same way and he said the same thing to them too. Then the gods accepted his words saying, "You will be our Indra." 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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