श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 9: महाराज रजि और उनके पुत्रोंका चरित्र  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.9.25 
क्षत्रवृद्धसुत: प्रतिक्षत्रोऽभवत्॥ २५॥ तत्पुत्र: सञ्जयस्तस्यापि जयस्तस्यापि विजयस्तस्माच्च जज्ञे कृत:॥ २६॥ तस्यचहर्यधनोहर्यधनसुतस्सहदेवस्तस्माददीनस्तस्य जयत्सेनस्ततश्च संस्कृतिस्तत्पुत्र: क्षत्रधर्मा इत्येते क्षत्रवृद्धस्य वंश्या:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रवृद्ध का पुत्र प्रतिक्षत्र, प्रतिक्षत्र का संजय, संजय का जय, जया का विजय, विजय का कृत, कृत का हर्यधन, हर्यधन का सहदेव, सहदेव का अदीन, अदिन का जयत्सेन, जयत्सेन का संस्कृति और संस्कृति का पुत्र क्षात्रधर्मा हुआ। ये सभी क्षत्रवृद्ध के वंशज थे। 25-27॥
 
Kshatravruddha's son became Pratikshatra, Pratikshatra's Sanjay, Sanjay's Jai, Jaya's Vijay, Vijay's Krita, Krita's Haryadhana, Haryadhana's Sahadev, Sahadev's Adin, Adin's Jayatsen, Jayatsen's Sanskriti and Sanskriti's son was Kshatradharma. All of them were descendants of Kshatravruddha. 25-27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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