श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 8: काश्यवंशका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.8.18 
तस्याप्यलर्कस्य सन्नतिनामाभवदात्मज:॥ १८॥ सन्नते: सुनीथस्तस्यापि सुकेतुस्तस्माच्च धर्मकेतुर्जज्ञे॥ १९॥ ततश्च सत्यकेतुस्तस्माद्विभुस्तत्तनयस्सुविभुस्ततश्च सुकुमारस्तस्यापि धृष्टकेतुस्ततश्च वीतिहोत्रस्तस्माद्भार्गो भार्गस्य भार्गभूमिस्ततश्चातुर्वर्ण्यप्रवृत्तिरित्येते काश्यभूभृत: कथिता:॥ २०॥ रजेस्तु सन्तति: श्रूयताम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस अलर्क का सन्नति नाम का एक पुत्र भी था; सन्नति से सुनीथ, सुनीथ से सुकेतु, सुकेतु से धर्मकेतु, धर्मकेतु से सत्यकेतु, सत्यकेतु से विभु, विभु से सुविभु, सुविभु से सुकुमार, सुकुमार से धृष्टकेतु, धृष्टकेतु से वितिहोत्र, वितिहोत्र से भर्ग और भर्ग से भर्गभूमि नामक पुत्र हुआ; भर्गभूमि से चारों वर्णों का प्रसार हुआ। इस प्रकार काश्य वंश के राजाओं का वर्णन किया गया है; अब राजा की सन्तान का वर्णन सुनो॥18-21॥
 
That Alark also had a son named Sannati; Sannati had Sunith, Sunith had Suketu, Suketu had Dharmaketu, Dharmaketu had Satyaketu, Satyaketu had Vibhu, Vibhu had Suvibhu, Suvibhu had Sukumar, Sukumar had Dhrishtaketu, Dhrishtaketu had Vitihotra, Vitihotra had Bharg and Bharg had a son named Bhargbhumi; from Bhargbhumi the four varnas were spread. Thus the description of the kings of the Kashya dynasty has been done; now listen to the description of the progeny of the king.॥18-21॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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