श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 8: काश्यवंशका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.8.15 
ततश्च कुवलयनामानमश्वं लेभे तत: कुवलयाश्व इत्यस्यां पृथिव्यां प्रथित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर उसे कुवलय नामक एक अद्भुत घोड़ा प्राप्त हुआ, जिससे वह इस पृथ्वी पर 'कुवलयाश्व' नाम से प्रसिद्ध हुआ ॥15॥
 
Subsequently he obtained a wonderful horse named Kuvalaya. That's why it became famous on this earth by the name 'Kuvalayashwa'. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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