श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  4.7.39 
तेषां च बहूनि कौशिकगोत्राणि ऋष्यन्तरेषु विवाह्यान्यभवन्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
उनसे अनेक कौशिक गोत्र के पुत्र और पौत्र उत्पन्न हुए, जो अन्य ऋषि वंशों में विवाह करने के योग्य थे ॥39॥
 
From him many Kaushik gotra sons and grandsons were born who were eligible to marry into other Rishi lineages. 39॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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