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vishnu 4.7.37: देवताओं ने विश्वामित्रजी को पुत्र रूप में भृगुवंशीय सूर्यदेव प्रदान किया था। उनके बाद उनके देवरात नाम का एक पुत्र हुआ और फिर मधुछंद, धनंजय, कृतदेव, अष्टक, कच्छप और हरितक नाम के और भी पुत्र हुए। 37-38॥   |   vishnu अध्याय 4.7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति   ।   vishnu अंश 4: चतुर्थ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.7.37 
विश्वामित्रपुत्रस्तु भार्गव एव शुनश्शेपो देवैर्दत्त: ततश्च देवरातनामाभवत्॥ ३७॥ ततश्चान्ये मधुच्छन्दोधनञ्जयकृतदेवाष्टककच्छपहारीतकाख्या विश्वामित्रपुत्रा बभूवु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने विश्वामित्रजी को पुत्र रूप में भृगुवंशीय सूर्यदेव प्रदान किया था। उनके बाद उनके देवरात नाम का एक पुत्र हुआ और फिर मधुछंद, धनंजय, कृतदेव, अष्टक, कच्छप और हरितक नाम के और भी पुत्र हुए। 37-38॥
 
The Gods had given Vishvamitraji the Bhrigu dynasty Sun:Shape as his son. After him, he had a son named Devarat and then more sons named Madhuchhand, Dhananjay, Kritdev, Ashtak, Kachhap and Haritak. 37-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)