श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.7.28 
तच्च विपरीतं कुर्वत्यास्तवातिरौद्रास्त्रधारणपालननिष्ठ: क्षत्रियाचार: पुत्रो भविष्यति तस्याश्चोपशमरुचिर्ब्राह्मणाचार इत्याकर्ण्यैव सा तस्य पादौ जग्राह॥ २८॥ प्रणिपत्य चैनमाह॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इनका विपरीत प्रकार से प्रयोग करने से तुम्हें क्षत्रिय के समान आचरण वाला, भयंकर से भयंकर अस्त्र-शस्त्रों को संभालने में तत्पर रहने वाला पुत्र प्राप्त होगा और उसके साथ शांतिप्रिय ब्राह्मण आचरण वाला पुत्र होगा।'' यह सुनकर सत्यवती ने उनके चरण पकड़ लिए और उन्हें प्रणाम करके कहा- ॥28-29॥
 
By using them in the opposite way, you will have a son with the behavior of a Kshatriya, who is ready to take care of the most dangerous weapons and he will have a son with peace-loving Brahmin conduct.'' On hearing this, Satyavati caught hold of his feet and bowed to him and said - ॥ 28-29॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas