श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.7.27 
मया हि तत्र चरौ सकलैश्वर्यवीर्यशौर्यबलसम्पदारोपिता त्वदीयचरावप्यखिलशान्तिज्ञानतितिक्षादिब्राह्मणगुणसम्पत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
मैंने उसे समस्त धन, पराक्रम, शौर्य और बल प्रदान किया था तथा उसमें शांति, ज्ञान, धैर्य आदि समस्त ब्राह्मणीय गुण डाले थे ॥27॥
 
I had bestowed upon him all the wealth, valour, bravery and strength, and had inculcated in him all the brahminical virtues such as peace, knowledge, forbearance, etc. ॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)