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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 7: जह्नुका गंगापान तथा जमदग्नि और विश्वामित्रकी उत्पत्ति
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श्लोक 10
श्लोक
4.7.10
तं चोग्रतपसमवलोक्य मा भवत्वन्योऽस्मत्तुल्यवीर्य इत्यात्मनैवास्येन्द्र: पुत्रत्वमगच्छत्॥ १०॥
अनुवाद
उसकी घोर तपस्या को देखकर, इस भय से कि कहीं बल में मेरे समान कोई न हो, इन्द्र स्वयं उसका पुत्र हो गया॥10॥
Seeing his fierce penance, Indra himself became his son out of the fear that no one should be equal to me in strength.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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