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श्लोक 4.6.94  |
| एकोऽग्निरादावभवत् एकेन त्वत्र मन्वन्तरे त्रेधा प्रवर्तिता:॥ ९४॥ |
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| अनुवाद |
| पूर्वकाल में एक ही अग्नि थी। उसी एक अग्नि से इस मन्वन्तर में तीन प्रकार की अग्नियाँ उत्पन्न हुईं ॥94॥ |
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| In the past there was only one fire. From that one fire, three kinds of fires originated in this Manvantar. ॥94॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे चतुर्थेंऽशे षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥ |
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