श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  4.6.92 
उर्वशीसालोक्यं फलमभिसंहितवान‍्॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
और उर्वशी के मैथुन का फल चाहा ॥92॥
 
And desired the fruit of Urvashi's sexual intercourse. 92॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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