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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र
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श्लोक 87
श्लोक
4.6.87
तदेनमेवाहमग्निरूपमादाय स्वपुरमभिगम्यारणीं कृत्वा तदुत्पन्नाग्नेरुपास्तिं करिष्यामीति॥ ८७॥
अनुवाद
इसलिए मैं इस अग्निरूपी अश्वत्थ को अपने नगर में ले जाकर अग्निरूपी बनाऊँगा और इससे उत्पन्न अग्नि की पूजा करूँगा।’ ॥87॥
Therefore I will take this fire-like Ashwattha to my city, make it a fire-fire and worship the fire produced from it.' ॥ 87॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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