श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  4.6.85 
शमीगर्भं चाश्वत्थमग्निस्थालीस्थाने दृष्ट्वाचिन्तयत्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
अग्निस्थली के स्थान पर राजा पुरुरवा ने शमीगर्भ पीपल का वृक्ष देखा और सोचा -॥ 85॥
 
At the place of Agnishthali, king Pururava saw a Shamigarbha Peepal tree and thought -॥ 85॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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