श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  4.6.83 
ममोर्वशीसालोक्यप्राप्त्यर्थमग्निस्थाली गन्धर्वैर्दत्ता सा च मयाटव्यां परित्यक्ता॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
गंधर्वों ने मुझे वह अग्निष्टलयी उर्वशी का सान्निध्य प्राप्त करने के लिए ही दी थी और मैंने उसे वन में ही छोड़ दिया।
 
The Gandharvas had given me that Agnishthalai only to attain the proximity of Urvashi and I left it in the forest itself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)