श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  4.6.79 
अन्तरटव्यामचिन्तयत्, अहो मेऽतीव मूढता किमहमकरवम्॥ ७९॥ वह्निस्थाली मयैषानीता नोर्वशीति॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
वन में जाते हुए उसने सोचा - 'हाय! मैं कितना मूर्ख हूँ! मैंने ऐसा क्या किया है कि मैं इस अग्निष्ठली को ले आया, उर्वशी को नहीं?'॥ 79-80॥
 
[On the way] into the forest he thought, 'Oh! What a fool I am! What have I done that I have brought this Agnishthalī and not Urvaśī?'॥ 79-80॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd