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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र
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श्लोक 71
श्लोक
4.6.71
साधु साध्वस्य रूपमप्यनेन सहास्माकमपि सर्वकालमास्या भवेदिति॥ ७१॥
अनुवाद
वाह! वाह! सचमुच, उनका रूप बड़ा ही मनमोहक है; हम भी सदैव उनके संग में रहें ॥ 71॥
"Wow! Wow! Indeed, His form is very enchanting; may we also be in His company forever." ॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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