श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  4.6.48 
तया सह सचावनिपतिरलकायां चैत्ररथादिवनेष्वमलपद्मखण्डेषु मानसादिसरस्स्वतिरमणीयेषु रममाण: षष्टिवर्षसहस्राण्यनुदिनप्रवर्द्धमानप्रमोदोऽनयत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा पुरुरवा ने दिन-प्रतिदिन बढ़ते हुए आनन्द के साथ कभी अलकापुरी के चैत्ररथ आदि वनों में और कभी सुन्दर कमलदलों से युक्त मानस आदि अत्यन्त सुन्दर सरोवरों में आनन्द करते हुए साठ हजार वर्ष व्यतीत किये।
 
Thereafter King Pururava, with increasing joy day by day, spent sixty thousand years reveling sometimes in the forests of Chaitrarath etc. within Alakapuri and sometimes in the very beautiful lakes like Manas etc. filled with beautiful lotus petals.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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