श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 6: सोमवंशका वर्णन; चन्द्रमा, बुध और पुरूरवाका चरित्र  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.6.28 
दुष्टेऽम्ब कस्मान्मम तातं नाख्यासि॥ २८॥ अद्यैव ते व्यलीकलज्जावत्यास्तथा शास्तिमहं करोमि॥ २९॥ यथा च नैवमद्याप्यतिमन्थरवचना भविष्यसीति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
"अरे दुष्ट माता! तू मुझे मेरे पिता का नाम क्यों नहीं बताती? मैं तुझ निकम्मी लज्जावती का ऐसा हाल करूँगा कि आज से तू धीरे बोलना भी भूल जाएगी।"॥28-30॥
 
"Oh wicked mother! Why do you not tell me my father's name? I will deal with you useless Lajjavati in such a way that from today itself you will forget to speak so softly."॥ 28-30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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