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श्लोक 4.6.28  |
| दुष्टेऽम्ब कस्मान्मम तातं नाख्यासि॥ २८॥ अद्यैव ते व्यलीकलज्जावत्यास्तथा शास्तिमहं करोमि॥ २९॥ यथा च नैवमद्याप्यतिमन्थरवचना भविष्यसीति॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| "अरे दुष्ट माता! तू मुझे मेरे पिता का नाम क्यों नहीं बताती? मैं तुझ निकम्मी लज्जावती का ऐसा हाल करूँगा कि आज से तू धीरे बोलना भी भूल जाएगी।"॥28-30॥ |
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| "Oh wicked mother! Why do you not tell me my father's name? I will deal with you useless Lajjavati in such a way that from today itself you will forget to speak so softly."॥ 28-30॥ |
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