श्री विष्णु पुराण  »  अंश 4: चतुर्थ अंश  »  अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.3.46 
तथेति तद‍्गुरुवचनमभिनन्द्य तेषां वेषान्यत्वमकारयत्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
राजा ने ‘जैसी आपकी इच्छा’ कहकर गुरुजी की बात का अनुमोदन किया और अपने वस्त्र बदलवा लिए ॥46॥
 
The king approved of Guruji's words by saying 'as you wish' and got his clothes changed. ॥46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)