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श्री विष्णु पुराण
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अंश 4: चतुर्थ अंश
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अध्याय 3: मान्धाताकी सन्तति, त्रिशंकुका स्वर्गारोहण तथा सगरकी उत्पत्ति और विजय
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श्लोक 33
श्लोक
4.3.33
नैवमतिसाहसाध्यवसायिनी भवती भवत्वित्युक्ता सा तस्मादनुमरणनिर्बन्धाद्विरराम॥ ३३॥
अनुवाद
ऐसा दुस्साहस मत करो।’ ऐसा कहने पर वह सती होने का आग्रह छोड़ गई ॥33॥
Do not attempt such a daring act.' On being told thus, she desisted from the insistence of becoming a sati. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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